
मनुष्य बना अपने ही विनाश का कारण

प्रलय” एक ऐसी किताब है जो हमें हमारी वर्तमान जीवनशैली और उसके परिणामों पर गंभीरता से सोचने के लिए मजबूर करती है। इसे पढ़ते हुए मुझे एहसास हुआ कि जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ केवल बाहरी नहीं हैं, बल्कि हमारी सोच, आदतों और लालच का परिणाम हैं। किताब बहुत स्पष्ट और सीधे शब्दों में यह दिखाती है कि कैसे इंसान खुद ही अपने विनाश की दिशा में बढ़ रहा है। यह सिर्फ डराने वाली बातें नहीं करती, बल्कि हमें हमार...

“प्रलय” आपको पिघलते ग्लेशियर नहीं दिखाती, यह आपको आईने में खड़ा कर देती है। Acharya ji साफ़ कहते है; धरती मर नहीं रही, हम उसे मार रहे हैं। और हथियार कोई फैक्ट्री नहीं, हमारी अचेतन जीवन-शैली है। यह किताब बार-बार एक असुविधाजनक सवाल पूछती है: आप पृथ्वी बचाने की बात करते हैं, पर क्या आपने अपने उपभोग, वासना और ‘मैं’ को देखा है? 🤷♀️ पिछली पाँच सामूहिक विलुप्तियाँ प्राकृतिक थीं। छठी—मानव-निर्मित है।...

🌍 धरती जल रही है — और हम बेख़बर हैं। ना हमें दिखता धुआँ, ना सुनाई देती कराह। कहीं बाढ़, कहीं सूखा, कहीं जंगल राख बन गए — और हम अब भी कह रहे हैं, “सब ठीक है।” 🔥 2024 — अब तक का सबसे गर्म साल +1.55°C तापमान बढ़ा। भारत में 450 से ज़्यादा मौतें गर्मी से। दिल्ली में पारा 50°C तक पहुँचा। UAE, ब्राज़ील, पाकिस्तान में भयानक बाढ़। अमेरिका में तूफ़ान “हेलेन”, फिलीपींस में 6 टाइफून। 74 द...