
किताब का साइज, प्रिंट, लिखावट और सबसे जरूरी जो सीख इस किताब से मिलती है वो आप कभी समझा ही नहीं पाएंगे। बच्चे खुद ही किताब को नहीं छोड़ते, बाकी मोबाइल टीवी सब छूट जाता है अपने आप

स्नेहा जी, ये जो बच्चे खुद किताब नहीं छोड़ते, ये बात ही सब कुछ कह देती है। मोबाइल टीवी छुड़ाने के लिए ज़ोर लगाना पड़ता है, और यहाँ किताब खुद खींच रही है, बिना किसी ज़बरदस्ती के। जो चीज़ सच में पकड़ती है वो पकड़ने के लिए मनाती नहीं, बस अपनी जगह बना लेती है।