
आचार्य जी की सभी पुस्तक बहुत ही ज्यादा स्पष्ट और ऊंचाई की ओर ले जाने वाली है। कबीर साहब ने भक्तों को सुरमा बनाने की बात की उनके बाद सीधे-सीधे आज आचार्य प्रशांत जी ने ही भक्तों को सुरमा बनाने की बात की है। आचार्य जी 21वीं शताब्दी के एवं अब तक के सबसे महानतम दार्शनिक मनोवैज्ञानिक एवं संत हैं साथ ही कबीर साहब जी के समतुल्य है मेरे साहब भावनाओं से बढ़कर यह तथ्य है।