दुर्गासप्तशती सार + झुन्नूलाल

दुर्गासप्तशती सार + झुन्नूलाल

दो पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
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Description
सभी पाठकों के लिए दो पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर!
दुर्गासप्तशती सार + झुन्नूलाल + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।

दुर्गासप्तशती सार

वर्ष में दो बार धूमधाम से नवरात्रि मनाई‌ जाती है, नौ दिन देवी पूजा होती है, पर क्या हम सचमुच इस पर्व और देवी के मर्म को समझते हैं?

श्रीदुर्गासप्तशती, जो नवरात्रि का केंद्रीय ग्रंथ‌ है, उसमें जीवन के रहस्य को समझने के लिए अनेकों प्रतीकों का प्रयोग किया गया है — प्रकृति, पशु-पक्षी, असुर, देवता, और देवी स्वयं। ये प्रतीक हमारे जीवन‌ में किस प्रकार सार्थक हैं? इनका आज के संदर्भ में क्या अर्थ है?

इस पुस्तक के माध्यम से आचार्य प्रशांत बड़े ही अनूठेपन व सरलता से इन प्रतीकों का अर्थ बताते हैं और इनका आज के जीवन में उपयोग समझाते हैं।

यह पुस्तक दुर्गा सप्तशती ग्रंथ को सार रूप में आप तक लाने का एक प्रयास है।

झुन्नूलाल

झुन्नूलाल का नाम तो आपने सुना ही होगा!
यदि नहीं, तो आइए झुन्नू से आपका परिचय एक कहानी के माध्यम से कराते हैं।

झुन्नू सुई ढूँढ रहा है और उसके लिए पूरे मोहल्ले में खूब भाग-दौड़ कर रहा है। धनिया, माने मिसेज़ झुन्नू, आग-बबूला हुई बाहर आती हैं और फूट पड़ती हैं — नुन्नू की परवाह नहीं तुम्हें, अपनी सुई खोजने में लगे हो! ये तो बताओ कि आखिर सुई खोयी कहाँ थी?

झुन्नू: अ ब ब... घर के अंदर!

धनिया: जो भीतर खोया है उसे बाहर क्यों ढूँढ रहे हो?

झुन्नू: पर भीतर तो अंधेरा है, बाहर ज़्यादा रोशनी है, तो मैंने सोचा बाहर ही खोज लिया जाए।

तो कैसा लगा हमारा झुन्नू और उसकी शानदार कहानी?

झुन्नू वो जो भीतर से बेचैन है पर भीतर अज्ञान के अन्धेरे के कारण उसे लगता है कि बाहर भाग-दौड़ करके उसकी बेचैनी मिट जाएगी। भीतर से बेचैन सिर्फ़ झुन्नू है या आप भी? ये कहानी सिर्फ़ झुन्नू की है या आपकी भी?

कहानियों से बेहतर कोई माध्यम नहीं अहम् की चोरी पकड़ने का, और वो भी तब जब उनमें हास्य भी शामिल हो। आचार्य जी द्वारा सत्रों में सुनाई गई ऐसी ही हास्य से भरी और बोधपूर्ण कहानियों का‌ पात्र है झुन्नू जिन्हें इस पुस्तक में संकलित किया गया है। आशा है कि यह पुस्तक आपके लिए समझ और बोध के रास्ते को और अधिक हल्का और रोचक बना देगी।
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