दुर्गासप्तशती + शिवोहम् + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
दो पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए दो पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! दुर्गासप्तशती + शिवोहम् + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
दुर्गासप्तशती:
नवरात्रि केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मबोध का अवसर है। दुर्गासप्तशती के असुर हमारे भीतर के दम्भ, मद और मोह के प्रतीक हैं तथा देवी उनका संहार करने वाली जागृति का प्रतीक हैं। आचार्य प्रशांत ने इस ग्रंथ को सरल भाषा में समझाते हुए बताया है कि देवी उपासना कर्मकांड नहीं, बल्कि अपनी कुत्सित वृत्तियों और वासनाओं पर विजय का मार्ग है।
शिवोहम्:
शिव कोई व्यक्ति, देवता या ईश्वर नहीं, बल्कि बोध और सत्य के प्रतीक हैं। ऋभुगीता के अनुसार शिव प्रकाश रूप हैं—उस प्रकाश में स्वयं को और अपने जीवन को देखना ही शिव का संदेश है। शिव हमारे सभी किस्सों और भ्रमों से मुक्ति का लक्ष्य हैं, इसलिए उन्हें एक और कहानी या देवता बना लेना उनके वास्तविक अर्थ से दूर जाना है।
शिव न देवता हैं, न भगवान् हैं, न ईश्वर हैं; सत्य मात्र हैं। अंतर करना सीखो!