दुर्गासप्तशती + दुर्गासप्तशती सार + देवी: बंधन भी, मुक्ति भी (Set of 3) + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
तीन पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए तीन पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! दुर्गासप्तशती + दुर्गासप्तशती सार + देवी: बंधन भी, मुक्ति भी (Set of 3) + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
दुर्गासप्तशती:
नवरात्रि हम बड़े धूमधाम से मनाते हैं, पर क्या हम इसके मर्म को समझते हैं? महिषासुरमर्दिनी और उनके द्वारा किए गए असुर-संहार का हमारे जीवन से क्या संबंध है? इन प्रश्नों का उत्तर श्रीदुर्गासप्तशती ग्रंथ में मिलता है।
श्रीदुर्गासप्तशती में तेरह अध्याय और सात-सौ श्लोक हैं, जिनमें तीन चरित्र हमारे तीन प्रकार के अज्ञान—दम्भ, मद और मोह—के प्रतीक हैं। आचार्य जी ने इन चरित्रों को सरल और रोचक भाषा में समझाया है। यह पुस्तक देवी उपासना के वास्तविक अर्थ को समझने और कर्मकांड से परे माँ दुर्गा के प्रति सच्ची श्रद्धा जगाने में सहायक है। साथ ही, यह बताती है कि देवी जिन असुरों का संहार करती हैं, वे हमारी ही कुत्सित वृत्तियों और वासनाओं के प्रतीक हैं।
दुर्गासप्तशती सार:
वर्ष में दो बार धूमधाम से नवरात्रि मनाई जाती है, नौ दिन देवी पूजा होती है, पर क्या हम सचमुच इस पर्व और देवी के मर्म को समझते हैं?
श्रीदुर्गासप्तशती, जो नवरात्रि का केंद्रीय ग्रंथ है, उसमें जीवन के रहस्य को समझने के लिए अनेकों प्रतीकों का प्रयोग किया गया है — प्रकृति, पशु-पक्षी, असुर, देवता, और देवी स्वयं। ये प्रतीक हमारे जीवन में किस प्रकार सार्थक हैं? इनका आज के संदर्भ में क्या अर्थ है?
इस पुस्तक के माध्यम से आचार्य प्रशांत बड़े ही अनूठेपन व सरलता से इन प्रतीकों का अर्थ बताते हैं और इनका आज के जीवन में उपयोग समझाते हैं।
यह पुस्तक दुर्गा सप्तशती ग्रंथ को सार रूप में आप तक लाने का एक प्रयास है।
देवी: बंधन भी, मुक्ति भी (Set of 3) :
यह नवरात्रि विशेष पत्रिका 12 सचित्र पैनलों के माध्यम से देवी के मर्म पर आचार्य प्रशांत की शिक्षाओं को सरल और संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करती है।