
तत्त्वबोध आचार्य जी की एक पुस्तक है। इस पुस्तक में शंकराचार्य के मूल ग्रंथों को आचार्य जी ने सरल और सहज भाषा में समझाया है। मैंने यह पुस्तक पढ़ी है और इसके माध्यम से कई महत्वपूर्ण बातों को समझने का प्रयास किया है। इस पुस्तक से मैंने जाना कि दमन क्या है, दुख क्या है,अष्टावक्र और शंकराचार्य के दृष्टिकोण में क्या अंतर और समानता है, सच्चिदानंद (सत्य–चित–आनंद) का वास्तविक अर्थ क्या है। मुझे यह बात विशे...