
आज तक जो भी मैंने अपने बारे में और महिला के बारे में सोचा या जैसे मेरी समझ थी पूरी बदल दी इस किताब में मैं अपने आप को और एक महिला को और बेहतर तरी के समझ पा रहा हूं

गौरव जी, एक किताब ने समझ पूरी बदल दी, ये कोई छोटी बात नहीं। पर एक चीज़ पकड़ना, अपने बारे में और महिला के बारे में जो समझ अभी बनी है, इसे आखिरी मत मान लेना। किताब ने पुरानी समझ को हिला दिया है, यही उसका काम है। अब आगे देखते रहना, कहीं नई समझ ही एक नया पक्का खाँचा न बन जाए जिसमें आप महिला को और अपने आप को फिट करने लगें। जो सचमुच खुला है वो समझ रोज़ थोड़ा बदलती रहती है, एक बार तय होकर रुक नहीं जाती।