
मगर अब — अब उसे मालूम है कि कविता घेराव में किसी बौखलाए हुए आदमी का संक्षिप्त एकालाप है। ~धूमिल✨🍁 मन शांत सब के सोने पर मेरा एकांत एक बार फिर वही आदिम नींद पलकों पर आए एक बार फिर वही इच्छा मन पर छाए कि सोऊँ ऐसे कि फिर जागूँ न जगाए । ~ आचार्य प्रशांत🌟🥀