प्रेम क्या हैं। यह हमें आचार्य जी ने इस पुस्तक के माध्यम से बताया है। जिसे हम जान रहे हैं। और बुक स्टॉल पर गाते हैं। यह ऐसा गीत हैं। जो अब धड़कन बन चुका हैं। इसके बिना अब कुछ नहीं। पहले रिश्तें शरीर के थे आज वह प्रेम के हैं।