
पैसा – कितना और क्यों?” एक ऐसी किताब है जो पैसे के प्रति हमारे नजरिए को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखती है। इसे पढ़ते हुए मुझे एहसास हुआ कि पैसा केवल कमाने की चीज नहीं है, बल्कि इसे समझना और सही दिशा में उपयोग करना ज्यादा जरूरी है। किताब बहुत सरल भाषा में यह समझाती है कि पैसा न तो अपने आप में अच्छा है और न ही बुरा। यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए कर रहे हैं। मु...

आचार्य जी की हर एक किताब अपने आप में अमृत का प्याला है, लेकिन इस पुस्तक का मैने बहुत इंतजार किया था पढ़ने के लिए क्योंकि जल्दी उपलब्ध नहीं हो पाती थी। आज के लोगों के लिए प्रेरणा ✨ आज की पीढ़ी दौड़ में लगी है—अधिक कमाने, अधिक खर्चने, और अधिक दिखाने में। लेकिन किताब बताती है कि: 1- अगर आप पैसे को सही दृष्टि से समझेंगे, तो उसका गुलाम नहीं, मालिक बनेंगे। 2- पैसा आपको रोज़गार दे सकता है, लेकिन ...

इस पुस्तक📖 को पढ़कर मैंने सीखा की यह मायने नहीं रखता है कि हम कमा💸 कितना रहे हैं मायने यह रखता है कि जो कमा रहे हैं वह खर्च 🤑कहां पर कर रहे हैं। पहले मेरे साथ भी ऐसा ही होता था सैलरी आती तो थी पर लगता नहीं था की सैलरी💰 आई हुई है क्योंकि मैं उसको गलत जगह पर खर्च 🤑कर देता था अब मैं जो भी पैसे आते हैं उन्हें मैं सही दिशा(बोध)📚📖📚 में लगने लगा हूं उनका सही उपयोग कैसे करना है यह भी इस पुस्तक मे...

This book doesn't only tells about money but many more things outside the world like right use of wealth that people have. The best part of this book was is last chapter about share market that tells the difference between gambling and stocks One of the key things that i know is that accept that no work will give you all good and intelligent people Money is an inter-subjective belief and it depen...