
पहले मैं मोहवश बच्चों पर अपना अधिकार रखती थी कि मैं ही हूँ इनकी कर्ता-धर्ता, हर मान्यता को उनसे ये कहकर मनवाती कि ऐसा ही होता है, सब कर रहे है इसलिए तुम भी करो लेकिन जबसे ये किताब पढ़ी है खुद के साथ साथ बच्चों को अच्छा इंसान बनाने की कोशिश रहती है, आचार्य जी के माध्यम से उन तक वास्तविक धर्म पहुँचाने की कोशिश करती हूँ 🙏

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