
जीवन का एक पैटर्न हमे हमारे जन्म के साथ ही मिल जाता है। हमारे निर्णय भी हमारे नही होते। सबकुछ यहां वहां से मिलता है। इस किताब से जो मैने सीखा वो ये को ढर्रा बद्ध जीवन के अलावा भी जीवन जीने का तरीका है। ये किताब आचार्य प्रशांत के युवाओं के साथ संवाद का संकलन है।