
मैंने क्रांति को पढ़ते समय महसूस किया कि हम अक्सर बदलाव को केवल बाहरी चीज़ों से जोड़ते हैं—समाज, सिस्टम या दूसरों से। लेकिन यह किताब दिखाती है कि असली क्रांति हमारे भीतर की सोच, डर और conditioning को समझने से शुरू होती है। इस किताब की खास बात यह है कि यह केवल प्रेरणादायक बातें नहीं करती, बल्कि सीधे हमारे जीवन की वास्तविक समस्याओं पर बात करती है। कई जगह ऐसा लगा कि किताब मेरे ही विचारों और उलझनों को...