
मैंने क्रांति को पढ़ते समय महसूस किया कि हम अक्सर बदलाव को केवल बाहरी चीज़ों से जोड़ते हैं—समाज, सिस्टम या दूसरों से। लेकिन यह किताब दिखाती है कि असली क्रांति हमारे भीतर की सोच, डर और conditioning को समझने से शुरू होती है। इस किताब की खास बात यह है कि यह केवल प्रेरणादायक बातें नहीं करती, बल्कि सीधे हमारे जीवन की वास्तविक समस्याओं पर बात करती है। कई जगह ऐसा लगा कि किताब मेरे ही विचारों और उलझनों को...

👉 क्रांति:_ हर जवान व्यक्ति को इस शब्द से हमेशा सामना होते रहता है। जब भी हम अपने आप को किसी उलझनों में,किसी बंधनों में पाते हैं तो हमारे अंदर से एक वाक्य निकलता है:- क्रांति करो, व्यवस्था बदलो,कुछ परिवर्तित करो। 👉 हम जीवन के सारे समस्याओं,दुखों,उलझनों और बंधनों का कारण बाहर ही ढूंढते हैं और फिर उसका समाधान भी। हमारे अंदर ही कुछ ऐसा होता है जो सदा झुकने को ,दबने को तैयार रहता है। उसे ...

My life was going through a lot of helplessness earlier, I don't know why? When I read this book "Kranti", I understood that there is something inside me that is always ready to bow down, to be suppressed, either due to selfishness or desire. And it was because of this book that I came to know about this inner slavery. If you too don't like a life of helplessness, then this book will prove to be h...