
होली: गुजिया और गुलाल” सिर्फ होली के रंगों और मज़े की बात नहीं करती, बल्कि इस त्योहार के पीछे के असली अर्थ को समझाने की कोशिश करती है। किताब यह दिखाती है कि कैसे समय के साथ त्योहारों का असली उद्देश्य कहीं खो गया है और हम सिर्फ बाहरी दिखावे में उलझ गए हैं। यह बात काफी relatable है, क्योंकि आज त्योहार अक्सर बस celebration तक सीमित रह गए हैं। मुझे इसमें यह अच्छा लगा कि यह होली को एक symbol की तरह समझ...