
भक्ति पढ़ते समय मुझे यह समझ आया कि भक्ति केवल पूजा-पाठ या भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक गहरी समझ और सच्चाई से जुड़ने की प्रक्रिया है। इस किताब ने भक्ति के बारे में मेरी पुरानी धारणाओं को पूरी तरह बदल दिया। आचार्य प्रशांत ने बहुत स्पष्ट तरीके से बताया है कि सच्ची भक्ति अंधविश्वास या केवल भावुकता नहीं होती, बल्कि यह जागरूकता और सच्चाई के प्रति समर्पण है। पढ़ते समय कई बार ऐसा लगा कि मैं भक्ति...