
जब हम संसार से धोखा खाते है तो धोखा दो से खाया है। एक बाहर वाले से और एक खुद से क्योंकि बाहर भरोसा तो हमने ही किया था। इस किताब से मुझे खुदको, जगत को जानने में मदत मिल रही है और यह भी समझ आ रहा है कि मैने चीजों को बहुत अलग समझ लिया है, जो कि वैसी है ही नहीं। ये किताब हम जैसे है वैसे देखने में हमे मदत करती है। Thanku PAF

सुंदर 🔥🌱