
अहम (Aham) एक ऐसी किताब है जिसने मुझे अपने भीतर झाँकने पर मजबूर किया। हम रोज़मर्रा की जिंदगी में “मैं” को बहुत साधारण समझते हैं, लेकिन इस किताब को पढ़कर एहसास हुआ कि यही “अहम” हमारे अधिकांश दुखों और उलझनों की जड़ है। आचार्य प्रशांत ने बहुत सरल लेकिन गहरी भाषा में समझाया है कि कैसे अहंकार हमारे विचारों, रिश्तों और फैसलों को प्रभावित करता है। पढ़ते-पढ़ते कई बार ऐसा लगा जैसे मेरी अपनी ही सोच और व्यवह...