🔥 Gita for Everyday Life (1) 🔥

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तीन पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
5/5
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Description
सभी पाठकों के लिए तीन पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर!
वेदान्त + श्रीमद्भगवद्गीता भाष्य (भाग 1 + 2) [Hardbound] + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।

वेदान्त:

आत्म-जिज्ञासा के अभाव में मनुष्य अपना सबसे कीमती संसाधन, अपना जीवन ही खोता चलता है। चिन्ता कर-करके कुछ हासिल भी कर लिया तो ये कभी नहीं समझ पाता कि जो हासिल किया उसकी कीमत क्या, और वह हासिल करने के लिए जो गँवाया, उसकी कीमत क्या! यही कारण है कि सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथों में आत्म-जिज्ञासा को सबसे ऊँचा स्थान दिया गया है।

जिसे हम सनातन धर्म कहते हैं वह वेदों में अभिव्यक्त होता है, और वेदों के उत्कृष्ट शिखर को ही वेदान्त कहा जाता है। वेदों के ज्ञानकाण्ड के अंतर्गत आता है वेदान्त, जिसमें मात्र आत्म-जिज्ञासा को प्रधानता दी गयी है। प्रश्नों की एक लम्बी श्रृंखला वेदान्त में आकर अंतर्मुखी हो जाती है। और यह कहना गलत नहीं होगा कि उपनिषद् ही वेदान्त हैं, वेदों का शिखर हैं।

इस पुस्तक के माध्यम से आचार्य प्रशांत वेदान्त के मूल सिद्धांतों को समझाते हैं और प्रमुख उपनिषद् सूत्रों में छुपे गूढ़ रहस्यों को सरलता के साथ उजागर करते हैं। यह पुस्तक एक भेंट है उनके लिए जो अपनी आध्यात्मिक यात्रा में थोड़ा आगे बढ़ चुके हैं, साथ-ही-साथ उनके लिए भी जिन्होंने अपनी यात्रा बस अभी शुरू ही की है।

श्रीमद्भगवद्गीता भाष्य:

श्रीमद्भगवद्गीता कोई शाब्दिक चर्चा या सैद्धान्तिक ज्ञान मात्र नहीं, बल्कि रणक्षेत्र में खड़े एक योद्धा को सम्बोधित शब्द हैं। गीता का जन्म शान्त मनोरम वन या आश्रम में नहीं, रणक्षेत्र में हुआ है। अर्जुन जीवन से विरक्त शिष्य नहीं जो संसार त्यागकर कृष्ण के पास आए हों। अर्जुन के सामने एक तरफ़ धर्म है तो दूसरी तरफ़ सम्बन्धियों और गुरुजनों का मोह; बड़ा कठिन है निर्णय लेना कि अपनों पर बाण चलाएँ या नहीं। कृष्ण के समक्ष एक ऐसा हठी शिष्य है जो सुन तो रहा है, पर समझने को बहुत तत्पर नहीं। एक दृष्टि से देखें तो भगवद्गीता श्रीकृष्ण के अर्जुन के अज्ञान के प्रति संघर्ष की गाथा है। इस संघर्ष में श्रीकृष्ण के शस्त्र हैं वेदांत के सूत्र और सिद्धांत। गीता वेदांत की प्रस्थानत्रयी का प्रमुख स्तम्भ है। उपनिषदों के महावाक्य ही गीता में अत्यंत रोचक व व्यावहारिक रूप से उद्भूत होते हैं। हमारी भी स्थिति अर्जुन से अलग नहीं है; आम पाठक अर्जुन की स्थिति में अपनी छवि देख सकता है। यही बात हमारा एक विशिष्ट नाता जोड़ती है गीता से।

आचार्य प्रशांत का 'श्रीमद्भगवद्गीता भाष्य' गीता का विशुद्ध वेदांतसम्मत अर्थ आप तक ला रहा है। एक-एक श्लोक की व्याख्या में शुद्धता को ही केंद्रीय वरीयता दी गयी है। प्रस्तुत पुस्तक में श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय पाँच से अठारह तक के मुख्य श्लोकों की विस्तृत व्याख्या संकलित है।
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