
एक तरफ तो भारत ने आध्यात्म का उच्चतम शिखर ‘अद्वैत वेदांत’ देखा है और दूसरी तरफ पतन, अंधविश्वास और भ्रम का रसातल भी; तो ऐसे में एक मौलिक प्रश्न उठता है कि- उच्चतम दर्शन के प्रताप के बावजूद भी आज धर्म की इतनी दुर्दशा कैसे? वस्तुत: आध्यात्म का सरोकार होता है– व्यक्ति के दुख से, ना कि किसी परलोक में विराजमान भगवान से। हमारा प्रत्येक कर्म इसी दुख की अभिव्यक्ति होता है, यूं कहें तो दिन भर में कि...