जिस अवतार की हमे आश हैं वह बहार नही है कहीं ।अपनी ही मुर्खताओं, मान्यताओं और कामनाओं को आत्मज्ञान के प्रकाश में जानना होता है अब अपनी मुर्खताओं के प्रति विरोध और विद्रोह का आगाज ही आश हैं !