विद्यार्थी जीवन, पढ़ाई और मौज + झुन्नूलाल + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

विद्यार्थी जीवन, पढ़ाई और मौज + झुन्नूलाल + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

दो पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
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Description
ख़ास पाठकों के लिए विशेष दो पुस्तकों का कॉम्बो भारी छूट पर!
विद्यार्थी जीवन, पढ़ाई और मौज + झुन्नूलाल + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
पढ़ें और अपने जीवन को सही दिशा दें।

विद्यार्थी जीवन, पढ़ाई और मौज:

आजकल का युवा, खासतौर से भारत का, विभिन्न पारिवारिक, सामाजिक, शैक्षणिक व मीडिया, व्यावसायिक, शारीरिक दुविधाएँ, प्रेम व रिश्ते तथा गहरे अस्तित्ववान जीवन सम्बन्धी प्रश्नों से जुड़ी बहुधा चुनौतियों का सामना करता है। युवा वर्ग एक ऐसी नाज़ुक स्थिति में है जहाँ से ज़िंदगी में गलत मोड़ लेना काफी आसान है। आचार्य प्रशांत अपने एक अनोखे ही तरीके से युवा पीढ़ी की ऊर्जा और संघर्षों को संबोधित करते हैं। इस पुस्तक का यही उद्देश्य है कि आपको भी स्पष्टता मिले और अपने जीवन के निर्णय आप स्वयं अपनी सूझबूझ से कर सकें।

झुन्नूलाल

झुन्नूलाल का नाम तो आपने सुना ही होगा!
यदि नहीं, तो आइए झुन्नू से आपका परिचय एक कहानी के माध्यम से कराते हैं।

झुन्नू सुई ढूँढ रहा है और उसके लिए पूरे मोहल्ले में खूब भाग-दौड़ कर रहा है। धनिया, माने मिसेज़ झुन्नू, आग-बबूला हुई बाहर आती हैं और फूट पड़ती हैं — नुन्नू की परवाह नहीं तुम्हें, अपनी सुई खोजने में लगे हो! ये तो बताओ कि आखिर सुई खोयी कहाँ थी?

झुन्नू: अ ब ब... घर के अंदर!

धनिया: जो भीतर खोया है उसे बाहर क्यों ढूँढ रहे हो?

झुन्नू: पर भीतर तो अंधेरा है, बाहर ज़्यादा रोशनी है, तो मैंने सोचा बाहर ही खोज लिया जाए।

तो कैसा लगा हमारा झुन्नू और उसकी शानदार कहानी?

झुन्नू वो जो भीतर से बेचैन है पर भीतर अज्ञान के अन्धेरे के कारण उसे लगता है कि बाहर भाग-दौड़ करके उसकी बेचैनी मिट जाएगी। भीतर से बेचैन सिर्फ़ झुन्नू है या आप भी? ये कहानी सिर्फ़ झुन्नू की है या आपकी भी?

कहानियों से बेहतर कोई माध्यम नहीं अहम् की चोरी पकड़ने का, और वो भी तब जब उनमें हास्य भी शामिल हो। आचार्य जी द्वारा सत्रों में सुनाई गई ऐसी ही हास्य से भरी और बोधपूर्ण कहानियों का‌ पात्र है झुन्नू जिन्हें इस पुस्तक में संकलित किया गया है। आशा है कि यह पुस्तक आपके लिए समझ और बोध के रास्ते को और अधिक हल्का और रोचक बना देगी।
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