ताओ ते चिंग - भाग 1 + वेदान्त + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
दो पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए तीन पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! ताओ ते चिंग - भाग 1 + ताओ ते चिंग भाग - 2 + ताओ ते चिंग भाग - 3 + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
ताओ ते चिंग - भाग 1:
प्रस्तुत पुस्तक एक अनूठी पुस्तक है जो विश्व के प्राचीन ग्रंथों में से एक "ताओ ते चिंग" पर आचार्य प्रशांत के प्रवचनों को संकलित करती है। ताओवाद कोई आयोजित धर्म नहीं है, वो एक तरह की जीवन-पद्धति है। ताओवाद कहता है, ‘यदि जीवन में शुभता लानी है तो प्रकृति के पीछे क्या है, प्रकृति का आधार क्या है, उसको समझना पड़ेगा।’ वेदान्त का प्रतिपाद्य विषय भी जिज्ञासा है, जानना है।
आचार्य प्रशांत ने इस पुस्तक के माध्यम से “ताओ ते चिंग” के रहस्यमयी सूत्रों को वेदान्त के प्रकाश में आज के संदर्भ में सरल और सहज भाषा में समझाया है, जिससे पाठक इस प्राचीन ज्ञान को अपने जीवन में आत्मसात कर सकें। यह पुस्तक ताओवाद की शिक्षाओं को वर्तमान जीवन की चुनौतियों और आवश्यकताओं के प्रति अत्यधिक प्रासंगिक बनाती है। इस पुस्तक में “ताओ ते चिंग” से पहले 10 सूत्रों पर व्याख्या को संकलित किया गया है।
वेदान्त:
आत्म-जिज्ञासा के अभाव में मनुष्य अपना सबसे कीमती संसाधन, अपना जीवन ही खोता चलता है। चिन्ता कर-करके कुछ हासिल भी कर लिया तो ये कभी नहीं समझ पाता कि जो हासिल किया उसकी कीमत क्या, और वह हासिल करने के लिए जो गँवाया, उसकी कीमत क्या! यही कारण है कि सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथों में आत्म-जिज्ञासा को सबसे ऊँचा स्थान दिया गया है।
इस पुस्तक के माध्यम से आचार्य प्रशांत वेदान्त के मूल सिद्धांतों को समझाते हैं और प्रमुख उपनिषद् सूत्रों में छुपे गूढ़ रहस्यों को सरलता के साथ उजागर करते हैं। यह पुस्तक एक भेंट है उनके लिए जो अपनी आध्यात्मिक यात्रा में थोड़ा आगे बढ़ चुके हैं, साथ-ही-साथ उनके लिए भी जिन्होंने अपनी यात्रा बस अभी शुरू ही की है।