10 धोखे जो सब खाते हैं + वेदान्त + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

10 धोखे जो सब खाते हैं + वेदान्त + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

दो पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए दो पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर!
10 धोखे जो सब खाते हैं + वेदान्त + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।

वेदान्त:

आत्म-जिज्ञासा के अभाव में मनुष्य अपना सबसे कीमती संसाधन, अपना जीवन ही खोता चलता है। चिन्ता कर-करके कुछ हासिल भी कर लिया तो ये कभी नहीं समझ पाता कि जो हासिल किया उसकी कीमत क्या, और वह हासिल करने के लिए जो गँवाया, उसकी कीमत क्या! यही कारण है कि सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथों में आत्म-जिज्ञासा को सबसे ऊँचा स्थान दिया गया है।

इस पुस्तक के माध्यम से आचार्य प्रशांत वेदान्त के मूल सिद्धांतों को समझाते हैं और प्रमुख उपनिषद् सूत्रों में छुपे गूढ़ रहस्यों को सरलता के साथ उजागर करते हैं। यह पुस्तक एक भेंट है उनके लिए जो अपनी आध्यात्मिक यात्रा में थोड़ा आगे बढ़ चुके हैं, साथ-ही-साथ उनके लिए भी जिन्होंने अपनी यात्रा बस अभी शुरू ही की है।हर व्यक्ति जीवनभर किसी ऐसे की तलाश में रहता है जिस पर पूरा भरोसा किया जा सके। पर जब भी हमें लगता है कि संसार में कोई विश्वास करने लायक है, उतनी बार हम गलत साबित होते हैं।

कोई व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसे धोखा न मिला हो। पर चूँकि हम स्वयं को नहीं जानते और संसार को नहीं समझते, हम बार-बार वही गलतियाँ दोहराते हैं। हमारा भीतरी अज्ञान हमें यह देखने नहीं देता कि सिर्फ़ वस्तुएँ और परिस्थितियाँ बदल जाने भर से उनसे हमारा रिश्ता नहीं बदल जाता। जब तक हम भीतर से नहीं बदलते, तब तक हम उन्हीं गड्ढों में अलग-अलग तरीकों से गिरते रहेंगे।

प्रस्तुत पुस्तक में आचार्य प्रशांत हमें उन धोखों से अवगत करवाते हैं जिनमें हम अक्सर फँसते हैं। '10 धोखे जो सब खाते हैं' पुस्तक यह समझने में सहायक होगी कि धोखा खाने की वृत्ति हमारे भीतर ही बैठी हुई है, साथ-ही-साथ यह जानने में भी मदद करेगी कि कैसे हम बार-बार ठोकर खाने से बच सकते हैं।
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