संकल्प + संघर्ष + मोटिवेशन + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
तीन पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए तीन पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! संकल्प + संघर्ष + मोटिवेशन + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
संकल्प:
हम सब अपने लिए कुछ लक्ष्य बनाते हैं, और उन्हें पूरा करने के लिए अनेक संकल्प उठाते हैं। बहुत बार उन संकल्पों को पूरा करके बाहर-बाहर हम बहुत कुछ अर्जित भी कर लेते हैं, पर क्या उससे भीतर का खालीपन मिट जाता है? क्या ऐसा होता है कि जो मिला है उससे और पाने की चाहत ही खत्म हो जाए? वो चाहतें दोबारा उठें ही न?
हम एक संकल्प से दूसरे संकल्प पर दौड़ते रहते हैं लेकिन रुक कर यह नहीं पूछते कि संकल्प खुद पूरा होकर भी क्या हमें पूरा कर पा रहा है? क्या जीवन में कोई मूलभूत बदलाव आ रहा है?
आचार्य प्रशांत की यह पुस्तक संकल्प लेने वाले का ध्यान बाहर से भीतर की ओर मोड़ने का प्रयास है। संकल्पकर्ता कौन है? उसके संकल्प किन लक्ष्यों के लिए लिये जा रहे हैं? वो लक्ष्य ही कहॉं से निर्धारित हो रहे हैं?
यह पुस्तक व्यक्ति को इन मूल प्रश्नों की ओर लेकर आती है जिससे कि उसके संकल्प समझ और बोध से उठें, अज्ञानता और बाहरी प्रभावों के कारण नहीं। पुस्तक के माध्यम से आचार्य जी ने सही संकल्प से जुड़ी कुछ भ्रांतियों और चुनौतियों पर भी मार्गदर्शन किया है।
संघर्ष:
जीवन प्रतिपल संघर्ष तो है ही, पर हम यह नहीं जान पाते कि हमारे लिए कौनसा संघर्ष उचित है। और फिर हम छोटी लड़ाइयों में उलझकर बड़ी और महत्वपूर्ण लड़ाई से चूक जाते हैं।
बड़ी लड़ाई वो है जो अपने विरुद्ध की जाती है, असली संघर्ष वो है जो मन के विकारों को हटाने के लिए किया जाता है। जैसे-जैसे हमारा मन सुलझता जाता है, वैसे-वैसे हम बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए भी सक्षम होते जाते हैं। इस पुस्तक में हमें आचार्य प्रशांत से समझने को मिलेगा कि सही संघर्ष कौनसा है, वह क्यों ज़रूरी है और यह कि आनंद तो स्वयं से जूझने में ही है।
मोटिवेशन:
मोटिवेशन का ऊँचे-से-ऊँचा ग्रंथ आज तक कौनसा हुआ है? श्रीमद्भगवद्गीता। अर्जुन के सामने एक स्थिति है और वो भीतर से कमज़ोर अनुभव कर रहा है, उसे कोई उत्साह नहीं आ रहा, तब कृष्ण उसको समझाते हैं—ये असली मोटिवेशन है।
कृष्ण उसको नहीं कहते कि, "चल, जल्दी लड़ जब तक तू जीत न जाए!" इस तरह का कोई श्लोक है क्या गीता में? कृष्ण अर्जुन को क्या याद दिलाते हैं? कृष्ण अर्जुन को धर्म याद दिलाते हैं।
तुम्हें मोटिवेशन की नहीं क्लैरिटी की, स्पष्टता की, ज्ञान की ज़रूरत होती है। गीता तुम्हें क्या देती है? ज्ञान देती है। उत्साह थोड़े ही बढ़ाती है कि वीर तुम बढ़े चलो!
सही लक्ष्य तुम्हारा उत्साहवर्धन करके नहीं पाया जाता, तुम्हारा ज्ञानवर्धन करके पाया जाता है। अर्जुन का एक बार भी उत्साहवर्धन नहीं करते कृष्ण, ज्ञानवर्धन करते हैं।
जानें मोटिवेशन से जुड़े सभी सवालों के अर्थ आचार्य प्रशांत की इस आसान पुस्तक के माध्यम से।