माया तजूँ तजि नहिं जाइ + वारि जाऊँ मैं सतगुरु के + जो मैं बौरा तो राम तोरा + मन मस्त हुआ + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
चार पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
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Description
सभी पाठकों के लिए चार पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! माया तजूँ तजि नहिं जाइ + वारि जाऊँ मैं सतगुरु के + जो मैं बौरा तो राम तोरा + मन मस्त हुआ + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
माया तजूँ तजि नहिं जाइ:
धन माया है! स्त्री माया है! घर-परिवार माया है!
यह पुस्तक 'माया' की पारंपरिक और वास्तविक समझ के अंतर को स्पष्ट करती है। यह माया को छोड़ने की नहीं, बल्कि उसे सही रूप में समझने की दिशा में ले जाती है, जिससे जीवन अधिक सहज और स्पष्ट बनता है।
वारि जाऊँ मैं सतगुरु के:
गुरु तुम्हें कुछ देता नहीं है, वो तुम्हें पैदा करता है।
आचार्य प्रशांत इस भजन की व्याख्या करते हुए बताते हैं कि सच्चा समर्पण भावुकता नहीं, बल्कि ज्ञान की अंतिम परिणति है। यह पुस्तक स्पष्ट करती है कि भक्तियोग और ज्ञानयोग अंततः एक ही सत्य की ओर ले जाते हैं।
जो मैं बौरा तो राम तोरा:
यह पुस्तक अहंकार, मान्यताओं और झूठी स्वतंत्रता की परतों को खोलते हुए दिखाती है कि स्पष्टता ही सही निर्णयों और मुक्त जीवन का आधार है। यह अपनी धारणाओं को पहचानकर उनसे ऊपर उठने का आमंत्रण है।
मन मस्त हुआ:
कबीर साहब का यह भजन आत्मबोध से मिलने वाली वास्तविक मस्ती और आनंद की ओर संकेत करता है। भजन को गाने मात्र से जो आनंद आता है, यह पुस्तक आपको उस आनंद की जड़ तक ले जाने का आमंत्रण है।
यदि आप इस मस्ती को सिर्फ़ छूना नहीं, जीना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए है।