माया तजूँ तजि नहिं जाइ + पानी में मीन प्यासी + मोको कहाँ ढूँढे रे बंदे + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
तीन पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए तीन पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! माया तजूँ तजि नहिं जाइ + पानी में मीन प्यासी + मोको कहाँ ढूँढे रे बंदे + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
माया तजूँ तजि नहिं जाइ:
धन माया है! स्त्री माया है! घर-परिवार माया है!
यह पुस्तक 'माया' की पारंपरिक और वास्तविक समझ के अंतर को स्पष्ट करती है। यह माया को छोड़ने की नहीं, बल्कि उसे सही रूप में समझने की दिशा में ले जाती है, जिससे जीवन अधिक सहज और स्पष्ट बनता है।
पानी में मीन प्यासी:
“पानी में मीन प्यासी, मोहे सुन सुन आवे हाँसी।”
कबीर साहब की यह पंक्ति हमारी ही बेचैनी, प्यास और भ्रमों का आईना है। हम सबकी उलझी हुई स्थिति पर है। जो चाहिए, वह बाहर नहीं, हमारे भीतर है, फिर भी हम उसे संसार में खोजते रहते हैं। आचार्य प्रशांत ने इस भजन की प्रत्येक पंक्ति को वेदांत के आलोक में अत्यंत सरल, सजीव भाषा में स्पष्ट किया है।
मोको कहाँ ढूँढे रे बंदे:
यह पुस्तक कबीर साहब के कालजयी भजन की व्याख्या के माध्यम से दिखाती है कि जिस सत्य की खोज हम बाहर करते हैं, वह हमारे भीतर ही है। यह पाठक को अपनी मान्यताओं और भ्रमों को पहचानने की दृष्टि देती है।