मन + आनन्द + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

मन + आनन्द + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

दो पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
ख़ास पाठकों के लिए दो पुस्तकों का कॉम्बो भारी छूट पर!
मन + आनन्द + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।

मन:

मन क्या है? मन अपनेआप में एक व्यवस्था है जिसमें तमाम विचारों और भावनाओं की लहरें उठती-गिरती रहती हैं। मन को वास्तव में कहीं पहुँचना नहीं है। बल्कि इच्छा करना, इच्छित वस्तु को पाना, भोगना, फिर असन्तुष्ट हो जाना, फिर इच्छा करना, इसी दुष्चक्र में घूमते रहना मन का प्रयोजन है। मन की प्राकृतिक व्यवस्था में ऊँचाई या गहराई के लिए कोई जगह नहीं है।

जहाँ तक हमारी बात है, हमारा प्रयोजन है एक आज़ाद और भरपूर जीवन जीना जिसमें कोई चक्रवत बाध्यता न हो। पर मन में उठती लहरें हमारे नियन्त्रण में नहीं होती हैं। मन हमसे पूछकर नहीं चल रहा होता। हाँ, हम ज़रूर मन के ग़ुलाम बन जाते हैं। तो मन के अनुसार चलने का मतलब ही है एक बहुत-बहुत गहरी ग़ुलामी।

प्रस्तुत पुस्तक के माध्यम से आचार्य प्रशांत हमें बताते हैं कि मन की दासता में जीना कोई अनिवार्यता नहीं है। मन तो अहम् की छाया मात्र है, तुम अपनेआप को जैसे परिभाषित करोगे, तुम अपनी जो मान्यता रखोगे, मन वैसा ही हो जाएगा। तो मन की सूक्ष्मताओं को गहराई से समझने और आपको मन के पार ले जाने में यह पुस्तक अवश्य सहायक सिद्ध होगी।

आनन्द:

मनुष्य दुख के साथ जन्म लेता है, और जीवन की इस यात्रा में उसका दुख और बढ़ता ही जाता है। इस दुख को मिटाने के लिए वह सुख की ओर भागता है। सुख की आस में वह जो भी चीज़ इकट्ठा करता है, वो उसके दुख को और बढ़ा जाती है, क्योंकि सुख और दुख द्वैतात्मक स्थितियाँ हैं, एक-दूसरे के साथ चलती हैं।

आनन्द कोई द्वैतात्मक स्थिति नहीं होती, आनन्द है सुख-दुख के द्वैत से मुक्ति। आनन्द कोई खास स्थिति या अनुभव नहीं होती, बल्कि सारी स्थितियों और अनुभवों के प्रति उदासीनता को ही आनन्द कहते हैं। जब आनन्द है तो सुख में भी आनन्द है, दुख में भी आनन्द है।

आनन्द मनुष्य का स्वभाव है। जो आनन्दित है उसके लिए सुख की कोई होड़ नहीं है, दुख से कोई बैर नहीं है। जीवन के रण में जो भी स्थिति आएगी, उसको सबकुछ निर्विरोध स्वीकार है। ये जो निर्विरोध हो जाने की ताकत है, उसे ही आनन्द कहते हैं।

प्रस्तुत पुस्तक के माध्यम से आचार्य प्रशांत हमें सुख, दुख, खुशी, आनन्द जैसे शब्दों के वास्तविक अर्थों से अवगत कराते हैं और इनसे जुड़ी सभी प्रचलित भ्रांतियों का खंडन करते हैं। आप भी यदि सुख-दुख के द्वैत से निकलकर एक सहज और आनन्दपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं तो यह पुस्तक आपके लिए है।
Select Format
Share this book
Have you benefited from Acharya Prashant's teachings? Only through your contribution will this mission move forward.
Reader Reviews
5 stars 0%
4 stars 0%
3 stars 0%
2 stars 0%
1 stars 0%