
कठोपनिषद भाष्य (भाग 2) पढ़ते समय मुझे लगा कि यह पहले भाग से भी ज्यादा गहराई में ले जाने वाली किताब है। इसमें नचिकेता और यमराज के संवाद के माध्यम से “श्रेय” और “प्रेय” के बीच का अंतर बहुत स्पष्ट तरीके से समझाया गया है। सबसे ज्यादा असर इस बात ने डाला कि हम रोज़मर्रा की जिंदगी में अक्सर आसान और सुख देने वाले विकल्प (प्रेय) को चुन लेते हैं, जबकि सही रास्ता (श्रेय) थोड़ा कठिन लेकिन सार्थक होता है। यह स...