कठोपनिषद् (भाग - 1) + वेदान्त + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

कठोपनिषद् (भाग - 1) + वेदान्त + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

दो पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए दो पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर!
कठोपनिषद् (भाग - 1) + वेदान्त + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।

कठोपनिषद् (भाग - 1):

कठ उपनिषद् उन उपनिषदों की सूची में है जो न केवल सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं बल्कि सर्वाधिक प्रसिद्ध भी हैं। यह कृष्ण यजुर्वेद शाखा से सम्बन्धित है। इस उपनिषद् में उद्दालक के पुत्र नचिकेता और यम के बीच संवाद है जिसे एक कथा के रूप में लिखा गया है।

कथा की शुरुआत होती है ऋषि उद्दालक के सर्वमेध यज्ञ से जिसमें वो ब्राह्मणों को बूढ़ी गायें दान देते हैं। यह बात बालक नचिकेता को अनुचित लगती है और वो जाकर पिता से जिज्ञासा करते हैं, 'हे तात! आप मुझे किसे दान में देंगे?' बार-बार पुत्र से यह प्रश्न सुनकर पिता क्रोधित होकर कहते हैं, 'जा, तुझे मृत्यु को दिया।' यह सुन नचिकेता चुपचाप यम के द्वार चले जाते हैं और बिना कुछ खाये-पिये तीन दिन तक यमराज की प्रतीक्षा करते हैं। यमराज नचिकेता की सरलता और धैर्य से प्रसन्न होकर उन्हें तीन वर माँगने को कहते हैं।

नचिकेता तीन वर के माध्यम से जीवन और मृत्यु से जुड़े कुछ सवालों के जवाब चाहते हैं और इनसे जुड़े रहस्यों को बताने की माँग करते हैं, जिन्हें जानना हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य है क्योंकि इन्हीं तीनों वर से उसके कर्तव्य निर्धारित होते हैं।

यह पुस्तक आपकी इस जिज्ञासा का भी उत्तर देती है कि यह कथा हमसे कैसे जुड़ी हुई है और नचिकेता, यमराज और ऋषि उद्दालक किनके प्रतीक हैं।

कठोपनिषद् पर चल रही एक विशेष चर्चा श्रृंखला में आचार्य प्रशांत ने एक-एक श्लोक पर विस्तार से व्याख्या की है, जिनमें से इस पुस्तक में श्लोक 9 तक की व्याख्या को सम्मिलित किया गया है।

वेदान्त:

आत्म-जिज्ञासा के अभाव में मनुष्य अपना सबसे कीमती संसाधन, अपना जीवन ही खोता चलता है। चिन्ता कर-करके कुछ हासिल भी कर लिया तो ये कभी नहीं समझ पाता कि जो हासिल किया उसकी कीमत क्या, और वह हासिल करने के लिए जो गँवाया, उसकी कीमत क्या! यही कारण है कि सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथों में आत्म-जिज्ञासा को सबसे ऊँचा स्थान दिया गया है।

इस पुस्तक के माध्यम से आचार्य प्रशांत वेदान्त के मूल सिद्धांतों को समझाते हैं और प्रमुख उपनिषद् सूत्रों में छुपे गूढ़ रहस्यों को सरलता के साथ उजागर करते हैं। यह पुस्तक एक भेंट है उनके लिए जो अपनी आध्यात्मिक यात्रा में थोड़ा आगे बढ़ चुके हैं, साथ-ही-साथ उनके लिए भी जिन्होंने अपनी यात्रा बस अभी शुरू ही की है।
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