हमन है इश्क़ मस्ताना + संत सरिता - भाग 1 + प्रेम प्याला जो पिए + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
तीन पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए तीन पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! हमन है इश्क़ मस्ताना + संत सरिता - भाग 1 + प्रेम प्याला जो पिए + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
हमन है इश्क़ मस्ताना
हमन है इश्क़ मस्ताना, हमन को होशियारी क्या!
ज़िन्दगी को यदि किसी ने छक के पिया है तो वो हमारे संत हैं। कबीर साहब का ये भजन अनूठा है। इश्क और प्रेम का जो अर्थ हम आम दिनचर्या में इस्तेमाल करते हैं, उसने प्रेम के असली अर्थ को विकृत कर दिया है। अक्सर ही हम हमारे सबसे स्थूल बंधनों को प्रेम का नाम दे देते हैं।
वास्तविक प्रेम का काम है आपको जगत से आज़ादी दिलाना। प्रेम का काम आंतरिक है। प्रेमी कहता है, ‘मुझे ऊँचा उठना है, मुझे मुझसे बेहतर होना है, मुझे अपनी उच्चतम संभावना को पाना है।’ प्रेम का काम बिल्कुल अंदरूनी है। जब काम अंदरूनी है तो हमें दुनिया से क्या लेना-देना! “रहें आज़ाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या?” प्रेम का अनिवार्य लक्षण है ये कि वो आपको दुनिया से आज़ाद कर देता है, आत्मनिर्भर बना देता है।
इस पुस्तक के माध्यम से आचार्य प्रशांत परत-दर-परत भजन के अर्थ को खोलते हैं और उस ऊँचे प्रेम से हमारा परिचय करवाते हैं जिसमें व्यक्ति किसी दूसरे से नहीं बल्कि अपने ही छुटपन से ऊँचा उठने में रत है। आशा है प्रेम के सच्चे और ऊँचे अर्थ को समझने और उसे जीवन में उतारने के लिए यह पुस्तक आपके लिए लाभदायक सिद्ध होगी।
संत सरिता - भाग 1
यूँ तो बहुत लम्बे समय से ज्ञानीजन मनुष्य के दुख को समाप्त करने के लिए आत्मज्ञान की सीख देते रहे हैं, पर संकीर्ण और कुटिल मन उनका एक सीमा तक ही उपयोग कर पाया है। पर सन्तों के भजनों की सरलता और लयात्मकता का यह जादुई असर है कि बात बड़ी आसानी से मन की उलझनों और चालाकियों को पार करके हृदय की गहराई में प्रवेश कर जाती है।
एक संगीतमय और भक्तिमय माहौल में आचार्य प्रशांत ने इन भजनों की पंक्तियों को गहराई से और बडे़ ही सरल भाषा में समझाया है। उन्हीं चर्चाओं की श्रृंखला को प्रस्तुत पुस्तक के माध्यम से आपके समक्ष लाया गया है, जिससे आप भी इनमें छिपे गूढ़ और अमूल्य ज्ञान से अवगत हो सकें और बोधजनित भक्तिरस का स्वादन कर सकें।
प्रेम प्याला जो पिए
प्रेम की जो अभिव्यक्ति हमें कबीर साहब की रचनाओं में देखने को मिलती है, वह अन्यत्र मिलना मुश्किल है। उनकी साखियाँ प्रेम की एक अद्वितीय और गहरी समझ प्रदान करती हैं, जो गहराई से आध्यात्मिक और व्यावहारिक दोनों है।
दोहों का स्थूल अर्थ भी किया जा सकता है, पर जिस प्रेम की ओर कबीर साहब इशारा कर रहे हैं वह अति सूक्ष्म और छवियों से परे है। वास्तव में प्रकृति से तादात्म्य कम करना और मुक्ति की ओर बढ़ना ही प्रेम का सूचक है।
इस पुस्तक में आचार्य प्रशांत ने प्रेम के विभिन्न पहलुओं को हमारे सामने रखा है। वह उस प्रेम की भी बात करते हैं जो प्रेमी और प्रेमिका के बीच होता है, दोस्तों के बीच होता है, माता-पिता और बच्चों के बीच होता है।
प्रस्तुत पुस्तक में कबीर साहब के दोहों के माध्यम से प्रेम को व्यावहारिक रूप से समझाने का प्रयत्न किया गया है, कि प्रेम हमारे जीवन को रूपांतरित कर सकता है। जब हम बिना किसी अड़चन के प्रेम को अपने हृदय में उतरने देते हैं, मात्र तब ही हम वास्तव में जीवन के सौन्दर्य को देख पाते हैं।