
कबीर साहब के प्रसिद्ध भजन "घुँघट के पट खोल रे" की भावना से परिचय कराती यह पुस्तक वास्तव में एक अमूल्य उपहार है। इसे पढ़ते हुए ऐसा अनुभव होता है मानो हमारे जीवन के झूठे आवरण, भ्रम और आत्म-छल की परतें एक-एक करके हट रही हों। यह पुस्तक हमें हमारी वास्तविक स्थिति से परिचित कराती है और स्वयं को ईमानदारी से देखने का साहस भी प्रदान करती है।