Acharya Prashant (AP) Books | दुर्गासप्तशती + स्त्री + शक्ति + नवरात्रि + देवी: बंधन भी, मुक्ति भी (Set of 3) + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
दुर्गासप्तशती + स्त्री + शक्ति + नवरात्रि + देवी: बंधन भी, मुक्ति भी (Set of 3) + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
पाँच पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए पाँच पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! दुर्गासप्तशती + स्त्री + शक्ति + नवरात्रि + देवी: बंधन भी, मुक्ति भी (Set of 3) + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
दुर्गासप्तशती:
नवरात्रि हम बड़े धूमधाम से मनाते हैं, पर क्या हम इसके मर्म को समझते हैं? महिषासुरमर्दिनी और उनके द्वारा किए गए असुर-संहार का हमारे जीवन से क्या संबंध है? इन प्रश्नों का उत्तर श्रीदुर्गासप्तशती ग्रंथ में मिलता है।
श्रीदुर्गासप्तशती में तेरह अध्याय और सात-सौ श्लोक हैं, जिनमें तीन चरित्र हमारे तीन प्रकार के अज्ञान—दम्भ, मद और मोह—के प्रतीक हैं। आचार्य जी ने इन चरित्रों को सरल और रोचक भाषा में समझाया है। यह पुस्तक देवी उपासना के वास्तविक अर्थ को समझने और कर्मकांड से परे माँ दुर्गा के प्रति सच्ची श्रद्धा जगाने में सहायक है। साथ ही, यह बताती है कि देवी जिन असुरों का संहार करती हैं, वे हमारी ही कुत्सित वृत्तियों और वासनाओं के प्रतीक हैं।
स्त्री:
आज़ाद जीवन एक आज़ाद मन की अभिव्यक्ति है। यदि व्यक्ति का मन मुक्त नहीं है तो मुक्ति आंदोलन शायद ही कभी अपने उद्देश्य की पूर्ति कर पाएँगे। स्त्री का वस्तुकरण ही उसकी दासता का प्रमुख कारण है। इस दासता से मुक्ति तभी सम्भव है जब स्त्री ख़ुद को वस्तु-मात्र न समझे। दुनिया स्त्री का शोषण करती है उसे एक भौतिक वस्तु जानकर, और स्त्री उस शोषण को सहती है क्योंकि देह से उसने अपना तादात्म्य बैठा लिया है। इस अति महत्वपूर्ण पुस्तक में आचार्य प्रशांत ने करुणापूर्वक शरीर का सही स्थान बताया है, उसके आग्रहों पर सुझाव दिया है, और स्त्री के मन की मुक्ति के मार्ग पर प्रकाश डाला है, जो कि ना केवल उसे आंतरिक बल प्रदान करता है बल्कि उसकी उच्चतम की ओर यात्रा को एक उड़ान देता है।
शक्ति:
शिव केंद्र हैं, शिव सत्य हैं। शिव वो हैं जिन तक मन, ‘मन’ रहकर पहुँच नहीं सकता। शिव को तो रहस्य रहना है सदा। शक्ति मन है, संसार है। शिव में स्थिरता है, अचलता है। शक्ति में गति है, चलनशीलता है। शक्ति जीवन है, शक्ति वो सबकुछ है जिससे आप एक मनुष्य होकर के सम्बन्ध रख सकते हैं। शक्ति भाव है, शक्ति विचार है। शक्ति में संसार के सारे उतार-चढ़ाव हैं, आँसू हैं और मुस्कुराहटें हैं।
जो स्थान श्रीमद्भगवद्गीता का वेदांत में है, वही स्थान श्रीदुर्गासप्तशती का शाक्त सम्प्रदाय में है। शाक्त सम्प्रदाय हिन्दू धर्म का ही अंग है क्योंकि इसकी उत्पत्ति वैदिक परंपरा से हुई है और इसके आधार वेद हैं। शाक्त सम्प्रदाय सत्य के नारी रूप अथवा देवी रूप की उपासना करता है। और देवी की उपासना कई अर्थों में हमारे लिए ज़्यादा उपयोगी है क्योंकि शिव तो निराकार हैं, उनसे क्या सम्बन्ध बना सकते हैं हम? सम्बन्ध तो सगुणी प्रकृति से ही बन सकता है। और यही सम्बन्ध निर्धारित करेगा कि हम भवसागर से तरेंगे कि भवसागर में डूबेंगे।
नवरात्रि - भीतर के असुरों पर विजय:
नवरात्रि नौ रातों का वह पर्व है जो देवी की शक्तिशाली असुरों पर विजय का उत्सव मनाता है। पर क्या हो अगर पता चले कि ये असुर कहीं बाहर नहीं, हमारे भीतर ही हैं?
इस सुंदर कहानी में बच्चे जानेंगे कि आलस, लालच और कभी न खत्म होने वाली इच्छाओं के असुर उनकी ज़िंदगी में भी आ सकते हैं। और जैसे नवरात्रि की कहानी बताती है; इन असुरों से लड़ने का साहस, समझ और शक्ति हम में पहले से ही है।
देवी: बंधन भी, मुक्ति भी:
यह नवरात्रि विशेष पत्रिका 12 सचित्र पैनलों के माध्यम से देवी के मर्म पर आचार्य प्रशांत की शिक्षाओं को सरल और संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करती है।