
ईश उपनिषद” आकार में छोटा है, लेकिन इसका असर काफी गहरा है। यह कोई साधारण पढ़ने वाली किताब नहीं है—बल्कि हर पंक्ति आपको रुककर सोचने पर मजबूर करती है। इस पुस्तक में सबसे खास बात यह लगी कि यह जीवन के बहुत मूल सवालों पर सीधे प्रहार करती है—जैसे “मैं कौन हूँ?”, “क्या वास्तव में मेरा कुछ है?”, और “त्याग का असली अर्थ क्या है?” यह किताब दुनिया से भागने की बात नहीं करती, बल्कि यह दिखाती है कि दुनिया में रहत...