
अष्टावक्र गीता भाष्य पढ़ते समय मुझे एहसास हुआ कि अद्वैत वेदांत को समझना जितना कठिन लगता है, सही मार्गदर्शन में उतना ही स्पष्ट भी हो सकता है। इस पुस्तक में आचार्य प्रशांत ने अष्टावक्र गीता के गहरे श्लोकों को बहुत सरल और सीधे तरीके से समझाया है। किताब की खास बात यह है कि यह केवल शास्त्रीय व्याख्या तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसे जीवन से जोड़ती है। “मैं कौन हूँ” और “मुक्ति क्या है” जैसे प्रश्नों पर जो ...