Acharya Prashant (AP) Books | ✨ Dhanteras Special ✨
✨ Dhanteras Special ✨
दो पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
ख़ास पाठकों के लिए श्रीराम पर आधारित दो पुस्तकों का कॉम्बो भारी छूट पर! योगवासिष्ठ सार + हे राम! + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और अपने जीवन को सही दिशा दें।
योगवासिष्ठ सार:
हमने अब तक श्रीराम को रामायण से ही जाना है, जिसमें श्रीराम को हमने एक आज्ञाकारी बेटा, एक प्रजाहितैषी राजा और एक मर्यादापुरुष की तरह जाना है।
पर क्या हमने जाना है कि श्रीराम को आध्यात्मिक शिक्षा कहाँ से मिली थी? उनको अवतार क्यों कहा जाता है? वो इतने महान क्यों थे?
जिस प्रकार कृष्ण को समझने के लिए गीता चाहिए, उसी तरह राम को पूरी तरह समझने के लिए 'योगवासिष्ठ सार' चाहिए।
रामायण से निश्चित रूप से हमें भगवान राम के जीवन को जानने का मौक़ा मिलता है पर श्रीराम से जुड़ी जो मूल आध्यात्मिक शिक्षा है, वह 'योगवासिष्ठ सार' के माध्यम से हम तक पहुँचती है।
जिस प्रकार युवा सिद्धार्थ के मन में जीवन और संसार के प्रति गहन प्रश्न और वैराग्य का भाव उठा था, उसी तरह श्रीराम भी अपनी युवावस्था में व्याकुल और बेचैन हुए थे। उनके मन में भी जीवन के प्रति गहन जिज्ञासा उठी थी।
'योगवासिष्ठ सार' युवा राम और उनके गुरु महर्षि वसिष्ठ के संवाद का संग्रह है। यह ग्रन्थ बताता है कि एक युवक राजकुमार मर्यादापुरुषोत्तम राम कैसे बने।
प्रस्तुत पुस्तक में आचार्य जी ने महर्षि वसिष्ठ की शिक्षाओं और उनके दर्शन की सरल व्याख्या की है।
'योगवासिष्ठ सार' को समझे बिना आपका राम के प्रति प्रेम अधूरा ही रहेगा। यदि आप वाकई जानना चाहते हैं कि राम का नाम इतना ऊँचा और इतना पवित्र क्यों है, और उनकी महानता किसमें है, तो यह पुस्तक ज़रूर पढ़ें।
हे राम!:
वाल्मीकि के राम एक हाड़-माँस के पुरुष हैं, संसारी। वे श्रेष्ठ पुरुष हैं, धीर पुरुष हैं, वीर पुरुष हैं, पर हैं मानव ही।
तुलसीराम ने तुलसीदास होकर राम को भी निराकार से साकार कर दिया। तुलसी के राम परमब्रह्म हैं। तुलसी के राम तुलसी के हृदयपति हैं। तुलसी को राम प्यारे हैं, रामकथा प्यारी है, राम के संगी प्यारे हैं, राम के भक्त प्यारे हैं। तुलसी के लिए ये पूरा जगत राम का ही फैलाव है।
राम ने तुलसी को अपना उपहार दिया तो तुलसी ने अध्यात्म की श्रेष्ठतम परंपरा में उस उपहार को जगत में बाँट दिया। तुलसी ने जगत को जो राम दिया है, वो किसी कथा का नायक मात्र नहीं है, वो किसी भी कथा से बहुत आगे का है। वो जैसे श्रेष्ठतम की मानवीय अभिव्यक्ति है, जैसे निर्गुण सगुण होकर उतर आया हो।
और रामायण जितनी प्रसिद्ध और प्रचलित कभी न हुई थी, उतनी रामचरितमानस हुई। विश्व के सौ सबसे प्रभावशाली और सुप्रसिद्ध काव्यग्रंथों में मानस का स्थान प्रथम पचास में आता है।
क्यों मिली उसे इतनी व्यापक प्रसिद्धि? क्यों उत्तर भारत के घरों में आज भी सुबह मानस के साथ होती है?
क्योंकि तुलसी के राम एक छोर पर तो परमब्रह्म हैं और दूसरे छोर पर आपकी व्यावहारिक पहुँच के भीतर हैं। वो आपके सामने एक ऐसा वृत्त रखते हैं, एक ऐसा कथानक, जिसमें आप पार की झलक तो देख ही सकते हो, अपना चेहरा भी देखते हो। आपको ये उम्मीद बनती है कि आप हाथ बढ़ाओगे तो राम तक पहुँच जाओगे। वाल्मीकि के राम को भगवत्ता से ओत-प्रोत कर उन्होंने राम को घर-घर का राम बना दिया।