
यह किताब पढ़ते हुए मैं बार-बार अपनी ही चोरी पकड़ती हूँ — अपने भ्रम, अपने बहाने, अपने झूठे ‘मैं’ को। वेदांत यहाँ कोई सिद्धांत नहीं, सीधा आईना है। आराम नहीं देता, सच दिखा देता है। यह किताब आपको बेहतर नहीं बनाती, यह आपको असली बना देती है।🪔🕊️🌱 Reading on… to catch my own चोरी. 🫥

bilkul ❤️👍🏾😊⚡