
समय क्या होता है इसकी बहुत हि सुंदर व्याख्यान आचार्य जी ने समय किताब में दिया है, समय का रोना लगभग हर कोई रोता रहता है पर समय होता क्या है ये पता नहीं होता है इसलिए यूं हि समय निकल जाता है, बाहरी संघर्ष से कहीं ज्यादा लाभकारी है भीतर संघर्ष क्योंकि बाहर का माहौल तय तो भीतर से हि होता है, जगत हमारा हि प्रक्षेपण होता है और हमारी जैसी मन कि स्थिति होती है वैसा हि जग हमे दिखता है इसलिए भीतर से सहज...