
पुस्तक में देवी के विभिन्न स्वरूपों की चर्चा है जो प्रकृति के विभिन्न रूप हैं। जिस प्रकार दानव प्रकृति को केवल भोग की नजर देखते हैं उसी प्रकार आम इंसान हैं । प्रकृति को हमें भोगना नहीं है बस दूर से निहारना है। हमारे पहाड़ ' नदियाँ जंगल आदि सब नष्ट होने के कगार पर है जिसका एक प्रमुख कारण दानवों जैसी भोगवादी संस्कृति ।