
इस किताब को पढ़कर पता लगा कि नवरात्रा कितनी ऊंची और गहरी बात है। हम न जाने किन ऊपरी और मनोरंजक बातों को लेकर बैठ गए हैं। दुर्गा सप्तशती के तीनों चरित्रों में ये ही पता लगता है कि जैसे ये आज की ही बात है और वो सारे राक्षस अभी हमारे सामने ही मौजूद हैं। प्रकृति ही देवी है उसको भोग की नजर से देखने पर प्रकृति ही माया बन जाती है।