
आचार्य जी ने बहुत ही खूबसूरत तरीके से इस ग्रंथ के प्रतीकों को बताया है, देवता कौन है, असुर कौन है, देवी कौन है सबसे अच्छी बात है कि आचार्य जी ने व्यवहारिक तल पर बात किए हैं कि कैसे देवता और असुर कोई पौराणिक पात्र भर नहीं है बल्कि हमारी मानसिक स्थिति से सरोकार है और कैसे हमारा प्रकृति के साथ गलत रिश्ता बहुत सी बीमारियों को जन्म दे देता है