अकेलापन और निर्भरता + समय + वेदान्त + शिवोहम् + मन + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

अकेलापन और निर्भरता + समय + वेदान्त + शिवोहम् + मन + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

पाँच पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए पाँच पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर!
अकेलापन और निर्भरता + समय + वेदान्त + शिवोहम् + मन + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।

अकेलापन और निर्भरता:

अकेलेपन का डर हमें आसक्ति और निर्भरता की ओर ले जाता है, जिससे जीवन में दुःख बढ़ता है। इस डर को गहराई से समझना ही सरल, स्वतंत्र और बोधपूर्ण जीवन की दिशा है। यह पुस्तक उसी समझ की ओर एक प्रयास है।

समय:

मन अतीत और भविष्य में उलझा रहता है, पर समय के वास्तविक स्वरूप को नहीं समझ पाता। इस पुस्तक में आचार्य प्रशांत बताते हैं कि समय क्या है और उसका सदुपयोग कर जीवन को सार्थक कैसे बनाया जाए।

वेदान्त:

आत्म-जिज्ञासा के बिना मनुष्य अपना सबसे मूल्यवान संसाधन—जीवन—गँवाता रहता है। यह पुस्तक वेदान्त के मूल सिद्धांतों और उपनिषदों के गूढ़ रहस्यों को सरलता से समझाकर आध्यात्मिक यात्रा को स्पष्ट दिशा देती है।

शिवोहम्:

शिव माने बोध। ऋभुगीता कहती है कि शिव प्रकाश रूप हैं। उस प्रकाश में अपनी हालत और अपनी ज़िंदगी को देखो। यही महाशिवरात्रि का पर्व है।

‘शिव’ किसी व्यक्ति या देवता का नाम नहीं, बल्कि मन के केंद्र, बोध और सत्य का प्रतीक हैं। शिव हमारे सब किस्सों का लक्ष्य हैं; उन्हें एक और किस्सा या देवता बना लेना उनके वास्तविक अर्थ को खो देना है।

शिव न देवता हैं, न भगवान् हैं, न ईश्वर हैं; सत्य मात्र हैं। अंतर करना सीखो!

मन:

मन विचारों और इच्छाओं का निरंतर चलता चक्र है, जो हमें बंधनों में रखता है। आचार्य प्रशांत बताते हैं कि मन की दासता अनिवार्य नहीं है; मन को समझकर उसके पार जाना ही स्वतंत्र और सार्थक जीवन की दिशा है।
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