गुरु लोग और बड़े-बड़े पदाधिकारी भारत में और दुनिया भर से योग दिवस को अपना समर्थन दर्शाते हैं। लोग शारीरिक मुद्राओं में अपनी तस्वीरें डालते हैं — एक योगा मैट होता है, उसपर योगा करते हुए कहते हैं, "Celebrating Yoga Day!" लेकिन योग का संबंध व्यायाम और कसरत से नहीं, बल्कि मन से है। योग मन की बात है — क्योंकि मन परेशान है। और योग वास्तव में क्या है — यह जानना है, तो भगवद्गीता की ओर जाना ही पड़ेगा।
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, नमस्ते। आज योग दिवस है, तो देश-दुनिया के जितने भी समाचार हैं, हर जगह पर योग को लेकर ही चर्चा हो रही है। तो मैं काफ़ी चीज़ें पढ़ रहा था, तो वहाँ पर एक चीज़ मुझे बार-बार पढ़ने को मिल रही थी, जहाँ पर लोग कह रहे थे कि योग जो है, वो भारत का सबसे बड़ा योगदान है पूरे विश्व के लिए — इंडियाज़ बिगेस्ट कंट्रीब्यूशन टू द वर्ल्ड इज़ योग।
अब ये पढ़ते ही मेरे मन में सबसे पहला सवाल ये आ रहा था, कि ठीक है योग दिवस है, लोग थोड़ा भावनाओं में बहकर बहुत बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं, पर मैं आपसे पूछना चाहता हूँ — क्या सच में ऐसा है?
आचार्य प्रशांत: नहीं ऐसा नहीं है। योग विश्व को भारत का ना सबसे बड़ा योगदान है, ना सबसे बड़ा निर्यात है। लेकिन साथ ही साथ ये बात पूरी तरह से गलत भी नहीं है अगर हम योग का सही अर्थ समझ लें। जब मैं कह रहा हूँ कि "जो भारत का सबसे बड़ा योगदान है विश्व को योग नहीं है," तो मैं उस योग की बात कर रहा हूँ जिसे आजकल "योग" माना जाता है। और जिसके लिए "योग दिवस" कल मनाया जाएगा।
कल योग दिवस किस योग के उत्सव में, उपलक्ष्य में मनाया जाएगा? आप पाएँगे कि लोग शारीरिक मुद्राओं में अपनी तस्वीरें डाल रहे हैं। गुरु लोग और बड़े-बड़े पदाधिकारी — राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री लोग भारत में भी दुनिया भर से योगा दिवस को अपना समर्थन दर्शा रहे हैं। किस तरह से? कि बैठ गए हैं पालथी मारकर, कोई आसन, कोई मुद्रा। तो ये जो शारीरिक क्रियाएँ, इनको योग माना गया है। और जो आप योग दिवस मनाते हो, वो वास्तव में इन शारीरिक क्रियाओं का उत्सव है।




