आचार्य प्रशांत: जो एक पैशनेट लाइफ़ होती है न, वो एक *पर्टिकुलर एक्ट तक ही पैशनेट नहीं होती; वो पैशनेट लाइफ़ ही होती है।
तुम्हें ड्रम बजाना अच्छा लगता है, तुम कितने घंटे ड्रम बजा सकते हो? दिन में कितने घंटे ड्रम बजा सकते हो, चार-पाँच? और दिन कितने घंटे का होता है?
प्रश्नकर्ता: चौबीस घंटे का।
आचार्य: चलो आठ घंटे सो लिये, तब भी बचे दस घंटे जब ड्रम नहीं बजा रहे हो। और तुम कह रहे हो कि मेरा सारा पैशन (जुनून) तो ड्रम बजाने में है। तो बाकी दस घंटे तुम्हारी ज़िन्दगी कैसी हो जाएगी? बोरिंग (उबाऊ), फ्रस्ट्रेटिंग (निराश)।
पैशनेट(जुनूनी) लाइफ़(जीवन) होती है; पैशनेट एक्ट (कार्य) नहीं होते। पैशनेट इंटरेस्ट (रूचि) नहीं होते। आप ये नहीं कह सकते हो कि मुझे सिर्फ़ ये करने में ही मज़ा आता है।
मेरी बात समझ रहे हो, मैं क्या कहना चाहता हूँ?
जब लाइफ़ पैशनेट होती है तो आप कहते हो कि मैं जो भी कर रहा हूँ उसे पूरे तरीक़े से करूँगा। और ज़िन्दगी बहुत बड़ी है, उसमें हर काम के लिए जगह है।




