स्वेच्छा से वेश्यावृत्ति? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)

प्रश्नकर्ता: जो प्रॉस्टिट्यूशन होता है, वेश्यावृत्ति, तो उसमें स्वीकृति है अगर तो उसमें दिक्कत क्या है? क्योंकि बहुत सारे देशों में इसी तरीके से..।
आचार्य प्रशांत: आप कह रहे हो कि अगर कोई स्वेच्छा से वेश्यावृत्ति में उतर रहा है तो इसमें क्या तकलीफ़ है?
प्र: जी।
आचार्य: कह रहे हैं कि अगर कोई स्वेच्छा से ही वेश्यावृत्ति कर रहा है तो इसमें तकलीफ़ क्या है। तकलीफ़ मुझे नहीं है, तकलीफ़ जो कर रहा है उसे है। मैं आपत्ति दर्ज कराने नहीं जा रहा, मैं सिर्फ़ बता रहा हूँ कि जो ऐसा कर रहा है वो तकलीफ़ में जी रहा है।
पूछने वाले थोड़ा ज़्यादा उदारवादी हैं, लिबरल मन के हैं। वो कह रहे हैं कि भई किसी महिला की देह है, अगर वो अपनी स्वेच्छा से वेश्यावृत्ति कर रही है तो आपको इसमें क्या समस्या है। है न, ऐसे ही पूछा जाता है न? कूल लगता है ऐसे पूछना - 'माइंड योर ओन बिज़नेस, आपको क्या समस्या है? उसका शरीर, उसके अधिकार, उसका फ़ैसला।‘
मुझे कोई समस्या नहीं है, समस्या उसको है; मुझे सहानुभूति है। मुझे समस्या नहीं है, मुझे संवेदना है; और सहानुभूति रखने से तुम मुझे नहीं रोक सकते।
ठीक है न इतनी बात, न्यायसंगत? या कुछ ग़लत बोल दिया?









