आप सपनों से परेशान होकर जागते हैं, फिर भी उन्हें पूरे दिन ढोते रहते हैं। अगर गड़बड़ी सपने में थी, तो उसे जागृत जीवन में क्यों लाना? वर्तमान जीवन अपने आप में पूर्ण है, पर आप उससे बचने के लिए बीते भ्रमों को पकड़े रहते हैं। सपने कामनाओं से जन्म लेते हैं; जितना उन्हें पकड़ोगे, उतना वे आपको पकड़ेंगे। छोड़ दो, तभी स्पष्टता आएगी।
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प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मेरा नाम दिव्यांशु है। मेरा प्रश्न है कि आपने अवचेतन और अचेतन की बात करी थी। और पिछले काफ़ी दिनों से कुछ चीज़ें चल रही हैं मन में, नींद के समय पर ख़ासकर, सपने ऐसे होते हैं, और जिनके मेरे शरीर पर भी असर कई बार दिखते हैं। कई बार परेशान होकर उठता हूँ, सुबह जागता हूँ, काम पर आने से पहले, और उसका असर मेरे काम और मेरे शरीर, दोनों पर दिखता है। कभी सिरदर्द भयानक, असह होता है। और तो मैं ये समझ नहीं पाता हूँ कि इसमें मुझे क्या करना चाहिए, और मैं काफ़ी दिनों से इसके बारे में पूछने का आपसे प्रयास भी कर रहा था।
आचार्य प्रशांत: सपनों में कुछ गड़बड़ आती है।
प्रश्नकर्ता: जी, कई बार, कभी किसी से लड़ाई-झगड़ा, कुछ ऐसा।
आचार्य प्रशांत: सपनों में गड़बड़ आती है, है न?
प्रश्नकर्ता: जी सर।




