‘तुम्हें बहुत ज्ञान हो, कोई ज़रूरी नहीं है। बड़ी-बड़ी बातें कर सको कोई ज़रूरी नहीं है, लच्छेदार भाषण दे सको कोई ज़रूरी नहीं है। तुम बिलकुल स्पष्टता से बता सको कि देखिए ऐसा है, ऐसा है, दुनिया ऐसी ही होती है, ये होता है, वो होता है और पूरा मॉडल बना सको उसकी भी कोई ज़रूरत नहीं है। मैं एक छोटी-सी बात कह रहा हूँ जो पता है कि सही है उस से पीछे मत हटना।‘
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
आचार्य प्रशांत: जानते हो ज़्यादातर लोग, आंतरिक रूप से खाली और गरीब क्यों रह जाते हैं? इसलिए क्योंकि वो बहुत सतर्क रहते हैं। वो अपनी परवाह बहुत ज़्यादा करते हैं। किसी ने कहा है कि आखिरकार तुम्हें अफ़सोस उन बातों का कम होता है जो तुमने करीं। पछतावा अपने किये हुए का कम होता है, पछतावा हमेशा ज़्यादा उन चीज़ों का रहता है जो उचित थीं और तुमने नहीं करीं।
समझ रहे हो?
किये हुए का भी पछतावा हो सकता है पर अधिकांशतः चूँकि हम डरे हुए होते हैं तो इसीलिए हम जो उचित कर्म होता है, राइट ऐक्शन उसको डर के मारे होने नहीं देते। दिख रहा होता है कि यही ठीक है पर अपनी सतर्कता, अपने बन्धन, अपनी चालाकी, बुद्धि, अपनी रक्षा ये सब आड़े आ जाते हैं। भविष्य आड़े आ जाता है, कैसे आड़े आ जाता है?
कुछ सामने खड़ा है, मौका है, अवसर है, वो कह रहा है कि आओ इसमें उपस्थित रहो, इसमें भागीदार बनो। पर भविष्य तुमसे बोलता है, ‘नहीं-नहीं, ये मौका चूक भी गया तो कोई बात नहीं…




