आध्यात्मिकता दुनिया से भागना नहीं, बल्कि उसे गहराई से समझना है। परिवार, बच्चों और समाज से संवाद के लिए उनके रुचि-क्षेत्रों को जानना आवश्यक है। किसी विचार को थोपने के बजाय समझ और निष्पक्षता से बात करनी चाहिए। आत्मज्ञान जीवन के हर क्षेत्र को दिशा देता है। सीखने की प्रक्रिया में जिज्ञासा, अध्ययन और खुला संवाद व्यक्ति को अधिक परिपक्व, प्रभावी और सार्थक बनाते हैं।
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प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी। एक साल पहले आपका वीडियो मेरे सामने आया। आपको जब मेरे हस्बैंड ने मुझे दिया कि आपको इनको सुनना चाहिए। मैंने कहा, ‘नहीं, मुझसे नहीं सुना जाएगा, ये बहुत स्लो बोलते हैं और मतलब मेरे टाइप के नहीं हैं ये।’ वो वीडियो बार बार मुझे भेजते रहे और आफ्टर सिक्स मंथ, जब मेरे मन में बहुत द्वंद्व हो गया कि क्या हो रहा है मुझे समझ ही नहीं आ रहा, मैंने जब आपका वीडियो सुना, उसके बाद से लेकर आज तक मैंने किसी को नहीं सुना।
आपकी लर्निंग्स, टीचिंग्स मेरी लाइफ़ में आती रहीं और मेरे दो बच्चे भी हैं और मेरी एज 30 प्लस है। अब क्या होता है? मेरी बेटी है, ग्यारह साल की, उसने बोला कि, ‘आपने आचार्य जी को जब से सुनना शुरू किया आपका जीवन बिल्कुल कैसा हो गया, आप तो बिल्कुल एक्साइटेड ही नहीं रहती हो, न किसी से बात करती हो। हमेशा बुक्स पढ़ती रहती हो और लोग किटी पार्टी करते हैं। अभी आपकी एज ही क्या है? और जैसे आप सीख रही हो, वैसे हमें भी सिखा रही हो। न आप कभी यूट्यूब देखने देती हो ग़लत लोगों को।’




