प्रश्नकर्ता: मेरा प्रश्न नोट्स में से है: "बीइंग अवेयर ऑफ़ डिमांड्स ऑफ बॉडी, बीइंग अवेयर ऑफ़ स्ट्रे थॉट्स, दिस इज़ इंटेलिजेंस। इट ऑकर्स थॉट् इज़ एन इनेडिक्वेट रिस्पांस टू स्टिमुलस। एन एडीक्वेट रिस्पांस इज स्पॉनटेनिटी।" ("शरीर की माँगों के प्रति जागरूक होना, आवारा विचारों से अवगत होना, यह बुद्धिमत्ता है। ऐसा होता है कि विचार उत्तेजना के लिए एक अपर्याप्त प्रतिक्रिया है। सहजता एक पर्याप्त प्रतिक्रिया है।") हमने देखा था कि हम ख़ुद भी ख़ुद को पास्ट में ही देख रहे हैं तो स्पॉनटेनिटी (सहजता) को कैसे समझें यहाँ पर?
आचार्य प्रशांत: स्पॉनटेनिटी का यही अर्थ होता है जो एकदम सीधा है, स्पष्ट ही है, उसको स्वीकार कर लेना, सिर झुका देना। बीच में मान्यता नहीं ले आना।
उदाहरण के लिए, आप किसी धार्मिक जगह पर किसी जानवर का क़त्ल होता देखें। बच्चा भी उसको देखकर रो पड़ेगा और बच्चा भी तुरंत बोल देगा कुछ ग़लत हो रहा है। लेकिन जो धार्मिक-मज़हबी आदमी होता है, उसे लगता ही नहीं कुछ ग़लत हो रहा है, क्यों? क्योंकि उसके और घटना के बीच में एक पूर्व निर्धारित विचार आ गया है। वह विचार नहीं आया होता तो वो व्यक्ति तत्काल बोल देता कि यह चीज़ ग़लत है। वह विचार क्या बोल रहा है? विचार यह बोल रहा है कि यह जो यहाँ पर कृत्य चल रहा है, क़ुर्बानी दी जा रही है, यह एक धार्मिक चीज़ है।
इस विचार ने उसको जो स्पष्ट था, सामने था, बिलकुल ऑब्वियस, प्रत्यक्ष, उसको देखने से भी वंचित कर दिया। है तो चीज़ आँखों के सामने, पर अब दिखायी नहीं दे रही है, क्योंकि मान्यता का पर्दा पड़ गया है।
आपको बात समझ में आ रही है?







